पहेली
जिंदगी हर पल नए सवाल खडा करती है. . . .
सवालों में हर बार इक पहेली हुआ करती है. . . .
कब तक इन पहेलियों में जकडता जाऊंगा मैं.....
कब तक अपने विचारों से लडता रहूंगा मैं.....
पता नहीं पर....
अन्त की तलाश में शायद खुद मैं एक पहेली बन गया हूं।
Dare to Dream....
लालायित अधरों से जिसने, हाय, नहीं चूमी हाला,
धर्मग्रन्थ सब जला चुकी है, जिसके अंतर की ज्वाला,
The cribbing is from Teacher's Day.
mauK sao tU Aivart khta jaa maQau¸ maidra¸ maadk halaa¸
"Madhushala - the house of liquor, pub"